CGST Agra: Reverse charge on more than Rs 5000 per day

आगरा में सर्राफा कारोबारी 5 हजार से ज्यादा का कैश खर्च प्रतिदिन कर रहें हैं तो रिवर्स चार्ज लगेगा।

आगरालीक्स…. आगरा में सर्राफा कारोबारी 5 हजार से ज्यादा का कैश खर्च प्रतिदिन कर रहें हैं तो रिवर्स चार्ज लगेगा। 30 जून के बाद से लगने वाला रिवर्स चार्ज हालाकि अगले माह वापस हो जाएगा। वहीं ई-वे-बिल को लेकर भी सर्राफा व्यापारियों में असमन्जस्य की स्थिति है। यदि आप किसी अन्य प्रदेश से 50 हजार से अधिक का माल खरीद रहे हैं तो ई-वे-बिल नहीं लगेगा इस गलतफहमी से बाहर निकल आइये।

यह जानकारी आगरा सर्राफा एसोसिएशन द्वारा जीएसटी, जॉब वर्क, ई-वे-बिल, रिवर्स चार्ज व अन्य व्यापारिक मुद्दों पर आयोजित गोष्ठी में सीए विवेक जैन ने दी। नमक की मंडी स्थित गुरु कृपा प्लाजा में आयोजित गोष्ठी में उन्होंने बताया कि किसी अन्य प्रदेश से 50 हजार से अधिक माल खरीदने पर ई-वे-बिल आवश्यक है।जीएसटी के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह फायदे का सौदा है। व्यापारियों के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि जीएसटी से महंगाई नहीं बढ़ी है। बल्कि जीएसटी में रजिस्टर्ड होने से व्यापारियों व कारीगरों को कई फायदे हैं। मोबिल किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने पर आप जीएसटी तो देते हैं, लेकिन उसका फायदा नहीं उठा पाते। जीएसटी में रजिस्टर्ट होने पर आप प्रोडक्ट पर दिए जाने वाली जीएसटी का लाभ ले सकेंगे। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम संयोजक मनीष पारोलिया ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से अध्यक्ष नितेश अग्रवाल कोषाध्यक्ष प्यारेलाल खंडेलवाल, महामंत्री अशोक कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष कुलभूषण गुप्ता (राम भाई), विमल नयन फतेहपुरिया, दीपक जैन, रामेश्वर प्रसाद, नरेन्द्र बंसल, सुनील वर्मा, स्वतंत्र कुमार, नीरज जैन, मनोज गुप्ता, मयंक अग्रवाल, धीरज वर्मा आदि उपस्थित थे।

हर माह आयोजित होगी संगोष्ठी

आगरा सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने बताया कि एसोसिएशन द्वारा एक सकारात्मक पहल की गई है। जिसमें व्यापारियों व कारीगरों को व्यापार से सम्बंधित जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए एसोसिएशन अब हर माह किसी विषय पर संगोष्ठी का आयोजन करेगी। जिससे व्पापारी नई कानूनी जानकारियों से अपडेट होने के साथ अनजानें में किसी तरह की गलती करने से बचे रहें। जीएसटी पर पहली संगोष्ठी है।

क्या सावधानी बरतें सर्राफा व्यापारी

-नई बिल बुक शुरू करें।

-दुकानों के बाहर फर्म का नाम व जीएसटी नम्बर का बोर्ड आवश्यक है। जांच में ऐसा न पाए जाने पर 25 हजार रुपए का जुर्माना है।

-कोई भी आईटीसी रह गया है तो उसे आखिरी रिटर्न में अवश्य शामिल कर दें।

-प्राइवेट कोरियर से माल भेज रहे हैं, इस बात का ध्यान रखें कि वह जीएसटी में रजिस्टर्ड है या नहीं।

-चालान में लापरवाही न करें, चालान कम्प्यूटराइज्ड निकालें।

-चालान की हमेशा तीन कॉपी बनवाएं। रजिस्टर्ड कारीगरों से काम कराना व्यापारी और कारीगर दोनों के लिए फायदेमंद है।