21st century Shravan Kumar who has carried his mother for Char Dham Yatra reaches Agra

charआगरालीक्स …बदलते दौर में अपने बुजुर्ग मां और पिता को डॉक्टर तक ले जाने के लिए बेटों पर समय नहीं है, ऐसे में चार धाम की यात्रा पर निकल कैलाश गिरी अपनी अंधी मां को कांवड में बिठाकर आगरा पहुंचे। यहां उन्हें देखने वालों की भीड लग गई। कुछ लोगों की आखें नम हो गई तो सैकडों लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। वे अपनी मां को 20 साल से कावंड के पलडे में बिठाकर यात्रा करा रहे हैं, उनके लिए अपनी मां की इच्छा पूरी करना ही जीवन का लक्ष्य है। प्रभु भी उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं, वे बिना थके 50 साल की उम्र में चारों धामों की यात्रा के अंतिम पडाव मथुरा में अपनी अंधी मां को दर्शन कराने के लिए ले जाएंगे।
मध्यप्रदेश जबलपुर के कैलाश गिरी ने के पिता सिकोड़ी लाल का 21 वर्ष पूर्व देहांत हो गया। मां श्रीमती अंधी थी, मां ने इच्छा जाहिर की, कि उन्हें चार धाम की यात्रा करनी है। मां की इच्छा को पूरी करने के लिए कावंड बनाई, अपनी मां को कावंड के एक पलडे में बिठाया और प्रभु में लीन होकर अपनी मां के साथ चारों धाम की यात्रा पर निकल पडे। पडाव आते गए और समय गुजरता गया।
20 साल से मां को करा रहे यात्रा
कैलाश गिरी ने जबलपुर से 20 वर्ष दो माह और 18 दिन पहले अपनी यात्रा शुरू की थी। उन्होंने मां को चारों धामों की यात्रा कराई, मंगलवार सुबह वे आगरा में रोहता नगर के पास पहुंचे। उन्हें देखने के बाद लोगों की भीड लग गई। आस पास के गांव के लोग वहां आ गए, जब लोगों को पता चला कि उनकी मां अंधी हैं और कैलाश गिरी उन्हें चारों धामों की यात्रा करा रहे हैं तो उनकी आंखों नम हो गई। यहां महिलाएं भी पहुंच गई। उनकी सेवा की गई। और विश्राम कराया गया।
मथुरा में अंतिम पडाव
20 वर्ष पूर्व हुआ यात्रा का शुरू हुआ यह सिलसिला अंतिम पड़ाव पर है। कैलाशगिरी ने बताया कि चारों धामों की यात्रा लगभग पूरी हो चुकी है। अब मथुरा वृंदावन जा रहे हैं, इसके बाद मां श्रीमती जहां जाने की इच्छा जाहिर करेंगी, उस ओर रुख कर लेंगे। उन्होंने बताया कि जीवन का लक्ष्य अपनी मां को प्रभु के हर तीर्थ, हर धाम के दर्शन कराना ही रह रह गया है।

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